श्लोक · भागवत गाथा

कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसङ्गः परं व्रजेत्

kīrtanād eva kṛṣṇasya mukta-saṅgaḥ paraṁ vrajet

केवल श्रीकृष्ण के नाम-कीर्तन से ही मनुष्य सब बन्धनों से छूटकर परम पद को प्राप्त होता है।

सन्दर्भ
श्रीमद्भागवत १२.३.५१
कहाँ आता है
पुस्तक ० · अंक एक · अध्याय पाँच — जिसने युग को जीने दिया · पृष्ठ २६

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