श्लोक
पुस्तकों के हर श्लोक का अपना पृष्ठ है
देवनागरी, IAST और अनुवाद, जैसे पुस्तक में रखे गए हैं।
- सत्यं परं धीमहि satyaṃ paraṃ dhīmahi परम सत्य का हम ध्यान करते हैं। श्रीमद्भागवत १.१.१ · पुस्तक ० · पूर्वपीठिका
- कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसङ्गः परं व्रजेत् kīrtanād eva kṛṣṇasya mukta-saṅgaḥ paraṁ vrajet केवल श्रीकृष्ण के नाम-कीर्तन से ही मनुष्य सब बन्धनों से छूटकर परम पद को प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत १२.३.५१ · पुस्तक ० · अध्याय पाँच
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय oṃ namo bhagavate vāsudevāya ॐ। भगवान वासुदेव को नमस्कार। पुस्तक ० · अध्याय दो